जब शब्दों ने संगीत का रूप लिया: मेरा लेखक बनने का सफर
जानिए पीयूष सिंह के लेखक बनने की अनकही कहानी और उनकी किताबों 'Self-Love Symphony' के पीछे की प्रेरणा।
SELF LOVE SYMPHONY
Piyush Singh
1/13/20261 min read
जब शब्दों ने संगीत का रूप लिया: मेरा लेखक बनने का सफर
नमस्ते दोस्तों,
आज जब मैं अपनी वेबसाइट authorpiyush.com की शुरुआत कर रहा हूँ, तो पीछे मुड़कर देखने पर एक लंबी यात्रा नज़र आती है। एक ऐसी यात्रा, जहाँ शब्दों ने मुझे खुद से दोबारा मिलवाया।
मैंने लिखना क्यों शुरू किया?
हम अक्सर दुनिया की भीड़ में दूसरों को खुश करने और उनकी उम्मीदों पर खरा उतरने में इतने व्यस्त हो जाते हैं कि अपनी ही आवाज़ सुनना भूल जाते हैं। मेरे साथ भी यही हुआ। लेकिन जब मैंने कागज़ और कलम उठाई, तो मुझे एहसास हुआ कि मेरे भीतर एक अनकहा संगीत है—एक ऐसी धुन, जिसे दुनिया को सुनाना ज़रूरी था।
'Self-Love Symphony' की कहानी
मेरी किताब 'Self-Love Symphony' केवल एक किताब नहीं, बल्कि मेरा एक हिस्सा है। इसे लिखते समय मेरा उद्देश्य बहुत सरल था: पाठकों को यह समझाना कि खुद की कद्र करना ही जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि है। हम अक्सर बाहर प्यार ढूंढते हैं, जबकि असली सुकून हमारे अपने भीतर छिपा होता है।
इस किताब का हर अध्याय एक राग की तरह है, जो आपको आत्म-स्वीकृति (Self-acceptance) और मानसिक शांति की ओर ले जाता है।
'The Unlikely Laureate' का संदेश
वहीं, मेरी दूसरी किताब 'The Unlikely Laureate' उन लोगों के लिए है जो अपनी क्षमताओं पर संदेह करते हैं। यह कहानी है उस छुपे हुए हुनर की, जो सही समय और सही नज़रिए का इंतज़ार कर रहा होता है।
मेरा आपसे वादा
एक लेखक के तौर पर मेरा यह ब्लॉग और यह वेबसाइट आपके और मेरे बीच एक सेतु (Bridge) का काम करेगी। यहाँ मैं केवल अपनी किताबों के बारे में ही नहीं, बल्कि मनोविज्ञान, प्रेरणा और जीवन के उन छोटे-छोटे अनुभवों को साझा करूँगा जो हमें बेहतर इंसान बनाते हैं।
आप मेरी इस यात्रा का हिस्सा बने, इसके लिए आपका दिल
से शुक्रिया।


