सुकून टॉक: जहाँ आपकी बातें सुनी जाती हैं

नमस्ते, मैं पीयूष हूँ—एक लेखक और आपका दोस्त। एक लेखक के तौर पर मैंने शब्दों को जिया है, पर आज के शोर भरे दौर में मैंने महसूस किया है कि हर कोई बोलना चाहता है, पर सुनने वाले बहुत कम हैं।

यह पहल क्यों? (The Initiative):

अक्सर हम अपनी बातें दिल में दबा लेते हैं क्योंकि हमें लगता है कि लोग हमें 'जज' करेंगे या हमारी बात नहीं समझेंगे। 'सुकून टॉक' मेरी एक छोटी सी सामाजिक पहल है जहाँ मैं आपको सुनने के लिए उपलब्ध हूँ।

यह कोई प्रोफेशनल थेरेपी नहीं है, बल्कि एक ऐसा सुरक्षित स्थान (Safe Space) है जहाँ आप बिना किसी झिझक के अपने मन का बोझ हल्का कर सकते हैं।मैं यहाँ आपको बिना जज किए, एक दोस्त की तरह शांति से सुनने के लिए मौजूद हूँ।

फीस ₹20 ही क्यों? (Why ₹20?):

यह कोई कमाई का जरिया नहीं है, बल्कि सिर्फ इसलिए है ताकि केवल वही गंभीर (Serious) लोग जुड़ें जो वाकई अपनी बात साझा करना चाहते हैं। यह छोटी सी राशि यह सुनिश्चित करती है कि मैं अपना पूरा समय और ध्यान सही व्यक्ति को दे सकूँ।

कैसे जुड़ें? (How it works):

  • माध्यम: यह पूरी तरह से एक ऑडियो चर्चा (Voice Call) होगी。

  • गोपनीयता: आपकी हर बात 100% सुरक्षित और गुप्त रखी जाएगी。

  • भाषा: हम आपकी मातृभाषा (हिंदी/हिंग्लिश) में बात करेंगे

⚠️ ज़रूरी सूचना (Disclaimer):

कृपया ध्यान दें कि मैं एक लेखक और श्रोता हूँ, कोई पेशेवर मनोचिकित्सक नहीं। किसी भी प्रकार की अभद्रता सहन नहीं की जाएगी और सत्र तुरंत रद्द कर दिया जाएगा। आपातकालीन स्थितियों में कृपया पेशेवर मदद लें।

दबे हुए अल्फाजों को आज लफ़्ज़ देते हैं, आप कहिए... मैं सुन रहा हूँ।